उत्पत्ति और कटाई

मिथिला मखाना, और बिहार भारत का ज़्यादातर मखाना क्यों उगाता है

मिथिला मखाना उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र का मखाना है, और इस नाम पर भौगोलिक संकेत (GI) टैग है। यह गाइड बताती है कि इस टैग का क्या मतलब है, बिहार का मखाना कहां उगता है, और एक दाना तालाब की तली से सील पैक तक कैसे पहुंचता है।

Makau Foods टीम द्वारा। आख़िरी अपडेट:

झटपट जवाब

मिथिला मखाना बिहार के मिथिला क्षेत्र में पैदा होने वाले मखाने का GI टैग वाला नाम है। भारत का लगभग तीन चौथाई मखाना बिहार उगाता है। दाने तालाब की तली से हाथ से निकाले जाते हैं, फिर सुखाए, भूने, फुलाए और साइज़ के हिसाब से ग्रेड किए जाते हैं।

बिहार के तालाब में कंधे तक डूबा किसान, पत्तों के बीच हाथ से मखाने के बीज इकट्ठा करता हुआ
मखाने के दाने तालाब की तली से हाथ से इकट्ठा किए जाते हैं।

मिथिला मखाना क्या है

मखाना Euryale ferox का बीज है, एक जलीय पौधा जो उथले तालाबों, झीलों और दलदली ज़मीन में उगता है। खाने लायक हिस्सा बीज है, जिसे भूनकर फुलाया जाता है और वह सफ़ेद फॉक्स नट बनता है जो दुकानों में बिकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, और खेती मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में होती है।

मिथिला उत्तर बिहार का एक क्षेत्र है, और मिथिला मखाना वहां के मखाने के लिए सुरक्षित नाम है। दरभंगा और मधुबनी, जो पारंपरिक मिथिला मखाना ज़िले हैं, वहां ज़्यादातर खेती अब भी पुराने तरीके से तालाबों में होती है।

मिथिला मखाना GI टैग का मतलब

भौगोलिक संकेत किसी प्रोडक्ट के नाम को उस जगह से जोड़ता है जहां से वह आता है। इस सेक्टर पर अपनी बैकग्राउंडर में भारत सरकार का प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो कहता है कि मिथिला क्षेत्र के मखाने की अनोखी क्वालिटी, पहचान और पारंपरिक ज्ञान की मान्यता में मिथिला मखाने को GI टैग दिया गया है। वह यह भी कहता है कि GI दर्जा कानूनी सुरक्षा देता है, बाज़ार में प्रोडक्ट को अलग पहचान देता है, और देश और विदेश में उसकी ब्रांडिंग मज़बूत करता है।

टैग नाम की रक्षा करता है। इसका मतलब यह नहीं कि बिहार का हर मखाना पैक मिथिला मखाना है, और यह कोई ग्रेड या साइज़ मानक भी नहीं है। अगर कोई पैक GI टैग का दावा करे, तो दावा साफ़ छपा होना चाहिए और विक्रेता उसे साबित कर सके।

स्रोत: PIB backgrounder on India's makhana sector (19 August 2026). आख़िरी जांच 15 अक्टूबर 2026.

सबसे ज़्यादा मखाना किस राज्य में होता है

बिहार में, और बहुत बड़े अंतर से। PIB के अनुसार भारत का लगभग तीन चौथाई मखाना और दुनिया की लगभग 80 से 85 प्रतिशत सप्लाई बिहार से है। भारत ने 2024-25 में 63,910 MT और 2025-26 में अनुमानित 80,590 MT मखाना पैदा किया, जिसमें से बिहार ने लगभग 60,000 MT पैदा किया।

बिहार के मखाना ज़िले

सरकारी और रिसर्च स्रोतों में बताए गए बिहार के मखाना उगाने वाले ज़िले
ज़िला या क्षेत्रस्रोत क्या कहता है
सुपौल, सहरसा, मधेपुराकोसी बेसिन के ज़िले जहां खेती ख़ास तौर पर ज़्यादा है (PIB)
मिथिला और सीमांचलउत्तर बिहार के आसपास के इलाके जहां काफ़ी खेती होती है (PIB)
पूर्णिया, कटिहार2021-22 में सबसे ज़्यादा उत्पादन, तालाब से खेत की खेती की ओर (ICRIER)
दरभंगा, मधुबनीपारंपरिक मखाना ज़िले जहां ज़्यादातर तालाब में खेती होती है (ICRIER)

खेत में खेती और स्वर्ण वैदेही व सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों ने पैदावार बढ़ाई है। औसत उत्पादकता 2024-25 में 2.03 MT प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 2.34 MT प्रति हेक्टेयर हो गई।

स्रोत: PIB backgrounder on India's makhana sector (19 August 2026); ICRIER, Strategies to Boost India's Makhana Exports (2025), published on the APEDA website. आख़िरी जांच 15 अक्टूबर 2026.

मखाने की कटाई: तालाब की तली से ग्रेड किए पैक तक

  1. बुवाई और बढ़त। बीज लगभग नवंबर में बोया जाता है। सर्दियों में पौधे में पत्ते आते हैं, लगभग मार्च में रोपाई होती है, और अप्रैल व मई में फूल और फल आते हैं।
  2. कटाई। जुलाई से अक्टूबर तक दाने तालाब की तली से हाथ से निकाले जाते हैं। यह काम ज़्यादातर मिथिला का मल्लाह मछुआरा समुदाय ख़ास छलनियों से करता है, और यह मखाने की खेती का सबसे महंगा हिस्सा है।
  3. सफ़ाई और सुखाई। कच्चे दाने धोए और सुखाए जाते हैं, ज़्यादातर घर या गांव के स्तर पर पारंपरिक औज़ारों से।
  4. भुनाई और फुलाई। सूखे दानों को तेज़ आंच पर भूना और फिर फुलाया जाता है, जिससे गिरी फैलकर दुकानों में बिकने वाला हल्का, कुरकुरा मखाना बनती है।
  5. पॉलिश और ग्रेडिंग। फूले मखाने को पॉलिश, छांटा और साइज़ व क्वालिटी के हिसाब से ग्रेड किया जाता है। बड़े, बेहतर दाने ज़्यादा कीमत पाते हैं।
  6. पैकिंग। तैयार मखाना व्यापारियों के लिए थोक बोरियों में या रिटेल पैक में भरा जाता है।

ग्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाले साइज़ ग्रेड हमारी मखाना साइज़ ग्रेडिंग गाइड में समझाए गए हैं।

स्रोत: ICRIER, Strategies to Boost India's Makhana Exports (2025), published on the APEDA website; PIB backgrounder on India's makhana sector (19 August 2026). आख़िरी जांच 15 अक्टूबर 2026.

Makau अपना मखाना कहां से लाता है

Makau बिचौलियों की चेन की जगह सीधे बिहार के कटाई करने वाले परिवारों से मखाना खरीदता है, जिनमें मल्लाह समुदाय के परिवार भी हैं, और बिहार के 40 से ज़्यादा कटाई करने वाले परिवारों का साथ देता है। फिर हर दाना हाथ से जांचा, हमारे अपने A+ ग्रेड में छांटा और सोर्स पर सील किया जाता है। पूरी कहानी हमारे होमपेज के शुरुआत वाले हिस्से में है।

हमारा मखाना बिहार से आता है। यह मिथिला मखाना GI टैग के तहत नहीं बेचा जाता, और हम ऐसा दावा नहीं करते।

बिहार का मखाना खरीदते समय क्या देखें

  • ऐसी उत्पत्ति जिसे जांचा जा सके। ज़्यादातर मखाने के लिए बिहार कहना ठीक है, लेकिन कोई ख़ास ज़िला या GI टैग पैक पर साफ़ लिखा होना चाहिए।

  • लिखा हुआ ग्रेड और साइज़। एक जैसे दाने और असली साइज़ की फ़ोटो देखें, सिर्फ़ प्रीमियम शब्द नहीं।

  • एक ही सामग्री, अगर आप कच्चा मखाना खरीद रहे हैं।

  • सील और तारीख वाला पैक, क्योंकि मखाना नमी सोखकर नरम हो जाता है।

कीमतों की तुलना से पहले हर पैक का मखाना का भाव प्रति किलो निकालें। हमारे पैक की जानकारी, उत्पत्ति और कीमत कच्चे मखाने के शॉप पेज पर है।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और निर्यात

भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की घोषणा की, और बोर्ड 15 सितंबर 2025 को बिहार में शुरू हुआ। मखाने के लिए एक केंद्रीय योजना का बजट 2025-26 से 2030-31 के लिए ₹476.03 करोड़ है, जिसमें रिसर्च, अच्छी क्वालिटी के बीज, किसान प्रशिक्षण, कटाई और कटाई के बाद के तरीके, ब्रांडिंग और निर्यात शामिल हैं।

2025-26 में भारत ने ₹19,296.08 लाख के 7,264.89 MT मखाना उत्पाद निर्यात किए। अमेरिका ने लगभग 40 प्रतिशत, कनाडा ने 20 प्रतिशत और UAE ने 17 प्रतिशत लिया।

स्रोत: PIB backgrounder on India's makhana sector (19 August 2026). आख़िरी जांच 15 अक्टूबर 2026.

मिथिला मखाना: आम सवाल

मिथिला मखाना क्या है?

मिथिला मखाना उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र में पैदा होने वाला मखाना है। इस नाम पर भौगोलिक संकेत (GI) टैग है, जो उस क्षेत्र के मखाने से जुड़ी क्वालिटी, पहचान और पारंपरिक ज्ञान को मान्यता देता है।

क्या मिथिला मखाने को GI टैग मिला है?

हां। मखाना सेक्टर पर भारत सरकार की PIB बैकग्राउंडर पुष्टि करती है कि मिथिला मखाने को GI टैग दिया गया है। GI दर्जा इस नाम को कानूनी सुरक्षा देता है और देश और निर्यात बाज़ार में इसे अलग पहचान दिलाता है।

सबसे ज़्यादा मखाना किस राज्य में होता है?

बिहार में। PIB के अनुसार यह भारत का लगभग तीन चौथाई मखाना और दुनिया की लगभग 80 से 85 प्रतिशत सप्लाई उगाता है। बिहार ने 2025-26 में लगभग 60,000 MT मखाना पैदा किया।

बिहार के किन ज़िलों में मखाना उगता है?

PIB कोसी बेसिन के सुपौल, सहरसा और मधेपुरा ज़िलों का नाम लेता है, साथ ही मिथिला और सीमांचल के आसपास के इलाकों का। ICRIER की एक रिपोर्ट 2021-22 में पूर्णिया और कटिहार को सबसे ज़्यादा उत्पादन वाले ज़िले, और दरभंगा व मधुबनी को पारंपरिक तालाब खेती वाले ज़िले बताती है।

मखाने की कटाई कैसे होती है?

दाने तालाब की तली से हाथ से निकाले जाते हैं, ज़्यादातर मल्लाह मछुआरा समुदाय द्वारा, ख़ास तरह की छलनियों से। फिर उन्हें साफ़ किया, सुखाया, तेज़ आंच पर भूना, फुलाया, पॉलिश किया और साइज़ व क्वालिटी के हिसाब से ग्रेड किया जाता है।

बिहार में मखाने की कटाई कब होती है?

2025 की ICRIER रिपोर्ट के फ़सल कैलेंडर के अनुसार बिहार में मखाना लगभग नवंबर में बोया जाता है, अप्रैल से मई में फूल और फल आते हैं, और जुलाई से अक्टूबर तक कटाई होती है।

क्या Makau मखाना GI प्रमाणित है?

नहीं। Makau मखाना बिहार से आता है और सीधे कटाई करने वाले परिवारों से खरीदा जाता है, लेकिन यह मिथिला मखाना GI टैग के तहत नहीं बेचा जाता।

बिहार का मखाना, सीधे खरीदा हुआ

बिहार के कटाई करने वाले परिवारों का हैंडपिक्ड मखाना, कच्चा और बिना फ्लेवर, हाथ से छांटा और सोर्स पर सील किया।

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